Gk

Editors Picks

Thursday, 6 October 2016

सामान्य ज्ञान part 2

सामान्य ज्ञान

*�कंजर�* जनजाति (राज.)

�यह जनजाति राज्य में हाडौती क्षेत्र में निवास करती है।
�'कंजर' शब्द "काननचार" से उत्पन्न हुआ है जिसका शब्दिक अर्थ है जंगल में विचरण करने वाला।
*Ⓜकंजर जनजाति अपराध प्रवृति के लिए कुख्यात है।*
*Ⓜकंजर जनजाति के लोग मृतक व्यक्ति के मुख में शराब की बूंदे डालते है।*

*पाती मांगना*�
�कंजर जनजाति के लोग अपराध करने से पूर्व अपने अराध्य देव का आशीर्वाद प्राप्त करते है, जिसे पाती मांगना कहते है।
*Ⓜकंजर जनजाति के लोग हाकम राजा का प्याला पीकर कभी झूठ नहीं बोलते।*
*Ⓜकंजर जनजाति के कुल देवता हनुमान जी तथा कुल देवी चैथ माता है।*

*मेला*�
*Ⓜचैथर माता का मेला (चैथ का बरवाड़ा -सवाईमाधोपुर)*
यह मेला *माघ कृष्ण चतुर्थी* को भरता है।
यह मेला *"कंजर जनजाति का कुम्भ"* कहलाता है।

�इस जनजाति के घरों में मुख्य दरवाजे के स्थान पर छोटी-छोटी खिडकियां बनी होती है जो भागने में सहायता करती है।

*Ⓜनृत्य* -  *चकरी नृत्य*

*कथौडी* जनजाति (राज.)

*Ⓜकथौड़ी जनजाति राज्य में उदयपुर जिले की कोटड़ा झालौड व सराडा तहसीलों में निवास करती हैं ।*

�यह जनजाति मूल रूप से महाराष्ट्र की है।
�यह जनजाति खैर के वृक्ष से कत्था तैयार करने में दक्ष मानी जाती है।
*�कथौडी जनजाति की महिलाऐं मराठी अंदाज में एक साड़ी पहनती है जिसे फड़का कहते है।*

*वाद्ययंत्र* - *तारपी, पावरी (सुषिर श्रेणी के)*

*Ⓜनृत्य*- मावलिया, होली

�ये दूध नहीं पीते।
�कथौड़ी जनजाति का पसंदीदा पेय पदार्थ महुआ की शराब है।
�गाय तथा लाल मुंह वाले बन्दर का मांस खाना पसंद करते है।

*�डामोर�* जनजाति (राज.)

*Ⓜडामेर जनजाति मुख्यतः डूंगरपुर जिले की सिमलवाड़ा पंचायत समिति में निवास करती है।*
�इनकी उत्पत्ति राजपूतों से मानी जाती है।
�इस जनजाति के लोग एकलवादी होते है। शादी होते ही लड़के को मूल परिवार से अलग कर दिया जाता है।
�ये मांसाहारी होते है।
*Ⓜइस जनजाति के पुरूष महिलाओं के समान अधिक आभूषण धारण करते है।*
*Ⓜडामोर जनजाति की पंचायत के मुखिया को मुखी कहा जाता है।*

*ⓂचाङियाⓂ* �
*होली के अवसर पर डामोर जनजाति द्वारा आयोजित उत्सव चाङिया कहलाता है।

*मेला* �
*Ⓜग्यारस रेवाड़ी का मेला*
डूंगरपुर में अगस्त- सितम्बर माह में भरता है।

*�सांसी�* �
�खानाबदोश जीवन यापन करने वाली सांसी जनजाति *भरतपुर* जिले मे निवास करती है।

�सांसी जनजाति की उत्पत्ति सांसमल नामक व्यक्ति से मानी जाती है।

*Ⓜसांसी जनजति के दो वर्ग है 1. बीजा- धनादय वर्ग 2. माला -गरीब वर्ग*

�सांसी जनजाति में विधवा विवाह का प्रचलन नहीं है।
�इस समाज में किसी विवाद की स्थिति में हरिजन व्यक्ति को आमंत्रित किया जाता है।

*मेला* �
*पीर बल्लूशाह का मेला*
संगरिया में जून माह में आयोजित होता है।

सामान्य ज्ञान ग्रूप

Share:

0 comments:

Post a Comment

Comments

Powered by Blogger.

Formulir Kontak

Name

Email *

Message *

Fashion

Technology

Fashion

Translate

Follow us

Most Trending

Recent Posts

Unordered List

Sample Text

Pages

Theme Support